दाल-चावल से बनी राखियों में दिखी बच्चों की रचनात्मकता, प्रकृति संरक्षण का भी दिया संदेश

सारंगढ़-बिलाईगढ़। रक्षाबंधन पर्व को बच्चों की रचनात्मकता, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए शासकीय प्राथमिक शाला धुता, संकुल केंद्र घौठला छोटे में विशेष गतिविधि आयोजित की गई। गतिविधि में बच्चों ने दाल, चावल सहित घर में आसानी से उपलब्ध प्राकृतिक सामग्री से आकर्षक राखियां तैयार कीं।
इस अभिनव गतिविधि की परिकल्पना और पहल सहायक शिक्षिका श्रीमती सहोद्रा पटेल द्वारा की गई। उन्होंने बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया कि बाजार से खरीदी गई राखी की अपेक्षा अपने हाथों से बनाई गई राखी में मेहनत, प्यार और भावनाओं का विशेष महत्व होता है। बच्चों को गतिविधि के माध्यम से सीखने के साथ अपनी कल्पनाशक्ति और कला को प्रदर्शित करने का अवसर मिला।
गतिविधि के दौरान बच्चों ने अलग-अलग आकार और डिजाइन की राखियां तैयार कीं। किसी ने दाल-चावल से फूल और ज्यामितीय आकृतियां बनाईं, तो किसी ने उपलब्ध प्राकृतिक सामग्री का उपयोग कर आकर्षक राखी तैयार की। इससे बच्चों में आत्मविश्वास, एकाग्रता, अनुशासन, सहयोग और नई चीजें सीखने की रुचि विकसित करने का प्रयास किया गया।
रक्षाबंधन के महत्व के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश
बच्चों को रक्षाबंधन के सांस्कृतिक एवं भावनात्मक महत्व से अवगत कराने के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा का संदेश भी दिया गया। बच्चों को पेड़ों को राखी बांधकर ‘प्रकृति की रक्षा’ का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया गया। शिक्षकों ने बताया कि प्राकृतिक एवं घर में उपलब्ध सामग्री से रचनात्मक वस्तुएं तैयार कर पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जा सकती है।
गतिविधि में माताओं और बच्चों को भी मिल-जुलकर कार्य करने, एक-दूसरे का सहयोग करने और अपनी रचनात्मकता दिखाने के लिए प्रेरित किया गया। बच्चों ने अपनी बनाई राखियां देखकर उत्साह और खुशी जाहिर की।
विद्यालय के प्रधान पाठक श्री ठण्डाराम सिदार एवं सहायक शिक्षक श्री दरबार लोहकार ने भी गतिविधि में सहयोग प्रदान किया। वहीं श्रीमती सहोद्रा पटेल की पहल और रचनात्मक सोच ने पूरी गतिविधि को विशेष रूप दिया।
संकुल शैक्षिक समन्वयक जीवित कुमार नायक, संकुल केंद्र घौठला छोटे तथा सारंगढ़ बीईओ श्रीमती शोमा सिंह ठाकुर ने विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियां बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ रचनात्मक सीख और अपनी संस्कृति व संस्कारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।





संकुल शैक्षिक समन्वयक जीवित कुमार नायक, संकुल केंद्र घौठला छोटे तथा सारंगढ़ बीईओ श्रीमती शोमा सिंह ठाकुर ने विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियां बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ रचनात्मक सीख और अपनी संस्कृति व संस्कारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।