जनपद पंचायत सारंगढ़ अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत जेवरा में लाखों रुपयों का हेराफेरी व भ्रष्टाचार का मामला आया सामने देखें ख़बर?

सारंगढ़:- जनपद पंचायत सारंगढ़ अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत जेवरा में लाखों रुपयों का हेराफेरी व भ्रष्टाचार का मामला आया सामने सरपंच कविभूषण अजगल्ले और मास्टरमांइड सचिव सतनोहर जोल्हे ने अपने रिश्तेदारों को वेंडर बना कर 14वें व 15 वें वित्त की राशि को गबन करने की नियत से, सरपंच सचिव ने फर्जी बिल लगाकर लाखों रूपये (राशि) का गबन किया गया है। वही ग्राम पंचायत में भारी भ्रष्टाचार किया गया है। वर्तमान में ग्राम पंचायत जेवरा में सरपंच कविभूषण अजगल्ले हैं और सचिव सतनोहर जोल्हे हैं।





वहीं सरपंच ने अपने रिश्तेदार मनोज अजगल्ले और सचिव सतनोहर जोल्हे ने अपने रिश्तेदार परमेश्वरी जोल्हे,सेवकराम जोल्हे,भरत जोल्हे,संजय जोल्हे व अन्य के नाम से पंचायत में किए गए कार्यों के निर्माण हेतु मटेरियल, मजदूरी सहित अन्य कार्यों का भुगतान किया गया है। अगर इसकी जांच किया जाते तो सरपंच सचिव दोनो ही दोषी पाया जाएगा। सरपंच सचिव के परिवार से कई लाखों रुपए के फर्जी बिल लगाकर मजदूरी या अन्य मदों से ग्राम पंचायत की राशियों का गबन किया गया है।
जबकि शासन के नियम में पंचायत राज अधिनियम के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदार किसी भी प्रकार का लाभ वाला कार्य नही कर सकते है।
यह कहता है पंचायत राज अधिनियम एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 पर नजर डाले तो उक्त अधिनियम के पृष्ठ क्रमांक 189 में धारा 69 के अंतर्गत अध्याय 8 में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि त्रि-स्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदार किसी भी प्रकार का लाभ वाला कार्य नहीं करेंगे। अधिनियम अंतर्गत धारा 40 में ऐसा करने पर जो प्रावधान दिये गये हैं, उसमें शासकीय सेवकों व जनप्रतिनिधियों को पद से पृथक करने केअलावा राशि की वसूली के साथ चुने हुए प्रतिनिधियों को 6 वर्ष के लिए चुनाव लडने से वंचित करने के प्रावधान हैं।