मधुबन जलाशय विवाद पर ग्रामीणों का बड़ा पलटवार; मछुआरा समिति का पट्टा रद्द करने की मांग

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के जल संसाधन उपसंभाग द्वारा मधुबन जलाशय मामले में 6 ग्रामीणों को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब मामला पूरी तरह गर्मा गया है। नोटिस के जवाब में मधुबन गाँव के दर्जनों ग्रामीण भारी संख्या में अनुविभागीय अधिकारी (जल संसाधन) कार्यालय पहुँचे और अपना लिखित जवाब सौंपा।
ग्रामीणों ने विभाग को सौंपे गए जवाब में स्पष्ट किया है कि उन्होंने जलाशय के गेट का दरवाजा नहीं तोड़ा है और न ही वहाँ किसी प्रकार की तोड़फोड़ की है। उन्होंने प्रशासन द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से झूठा और निराधार बताया है।
कार्यालय में अपनी बात रखते हुए ग्रामीणों ने दो टूक माँग रखी कि विभाग या तो किसानों को खेती के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध कराए या फिर मछुआरा समिति को व्यावसायिक मछली पालन के लिए जल आवंटन की व्यवस्था रोके। इसके साथ ही, ग्रामीणों ने संबंधित मछुआरा समिति का पट्टा तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का भी अनुरोध किया है।
ग्रामीणों ने एक बेहद गंभीर स्वास्थ्य समस्या को उजागर करते हुए बताया कि वे इस जलाशय के पानी का उपयोग पीने के लिए करते हैं। लेकिन मछुआरा समिति द्वारा इसमें व्यावसायिक मछली पालन के कारण लगातार अपशिष्ट पदार्थ डाले जा रहे हैं, जिससे पूरा पानी प्रदूषित होकर पीने योग्य नहीं बचा है।
प्रशासन द्वारा जारी नोटिस और ग्रामीणों के इस तीखे प्रतिवाद के बाद क्षेत्र में तनाव और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जल संसाधन विभाग इस पूरे मामले में आगे क्या निष्पक्ष कदम उठाता है।


