घरघोड़ा में जमीन घोटाले का बड़ा आरोप!

पटवारी-तहसीलदार की मिलीभगत से करोड़ों की भूमि हड़पने की शिकायत, जांच की मांग

घरघोड़ा। शिकायत अनुसार रायगढ़ जिले के घरघोड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम चारमार की भूमि को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित पक्ष ने अनुविभागीय अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि उनकी पैतृक आदिवासी भूमि के रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी कर जमीन का नामांतरण कर दिया गया और बाद में उसे निजी कंपनी के पक्ष में बेच दिया गया।
शिकायतकर्ताओं चिंतामणि गुप्ता एवं सराधाकर गुप्ता ने आरोप लगाया है कि खसरा नंबर 5/5, 5/6, 12/2, 64/81, 64/82, 64/83, 64/84, 72/2, 86/24, 86/29, 86/30, 86/40, 103/2, 107/2, 113/2, 118/2, 151/2 एवं 172/2 सहित कई भूमि पर उनका पैतृक अधिकार है। आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में कथित हेरफेर कर कुछ व्यक्तियों ने अपने नाम दर्ज करा लिए।
शिकायत में दावा किया गया है कि बिना विधिवत बंटवारा आदेश और बिना संबंधित हिस्सेदारों की सहमति के राजस्व रिकॉर्ड में संशोधन किया गया। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बाद में उक्त भूमि के एक हिस्से का पंजीकृत विक्रय पत्र तैयार कर निजी कंपनी के डायरेक्टर के पक्ष में विक्रय भी कर दिया गया।
पीड़ित पक्ष ने हल्का पटवारी, नायब तहसीलदार तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि दस्तावेजों में कथित कूटरचना (फर्जीवाड़ा) कर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की गई।
शिकायतकर्ताओं ने अधिकारी से हस्तक्षेप कर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा भूमि पर उनका अधिकार बहाल कराने की मांग की है।
अब उठ रहे बड़े सवाल…
क्या बिना वैध बंटवारा आदेश के नामांतरण किया गया?
राजस्व अभिलेखों में संशोधन किन अधिकारियों के आदेश पर हुआ?
भूमि विक्रय के समय वास्तविक हिस्सेदारों की सहमति ली गई थी या नहीं?
क्या राजस्व अमले और निजी पक्षों के बीच मिलीभगत हुई?


मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। अब निगाहें प्रशासनिक जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर टिकी हैं।