
सारंगढ़ – सारंगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत पिण्डरी में पंचायत की राशियों का हेराफेरी व भ्रष्टाचार का मामला आया सामने सरपंच प्रदीप महेश ने अपने भाई विक्रांत महेश के नाम से 15 वें वित्त की राशि को गबन करने की नियत से, सरपंच ने अपने भाई विक्रांत महेश को वेन्डर बता कर व फर्जी बिल लगाकर पंचायत की राशि का गबन किया गया है। वही ग्राम पंचायत में भारी भ्रष्टाचार किया गया है। वर्तमान में ग्राम पंचायत पिण्डरी में सरपंच प्रदीप महेश है
सरपंच के भाई विक्रांत महेश के नाम से पंचायत में किए गए कार्यों के मजदूरी सहित अन्य कार्यों का भुगतान किया गया है सरपंच ने अपने भाई विक्रांत महेश को वेंडर बनाकर फर्जी बिल तैयार कर भुगतान कराए गये है। अगर इसकी जांच किया जाते तो सरपंच ही दोषी पाया जाएगा।
जबकि शासन के नियम में पंचायत राज व्यवस्था के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदार किसी भी प्रकार का लाभ वाला कार्य नही कर सकते है।
यह कहता है पंचायत राज अधिनियम एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 पर नजर डाले तो उक्त अधिनियम के पृष्ठ क्रमांक 189 में धारा 69 के अंतर्गत अध्याय 8 में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि त्रि-स्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदार किसी भी प्रकार का लाभ वाला कार्य नहीं करेंगे। अधिनियम अंतर्गत धारा 40 में ऐसा करने पर जो प्रावधान दिये गये हैं, उसमें शासकीय सेवकों व जनप्रतिनिधियों को पद से पृथक करने केअलावा राशि की वसूली के साथ चुने हुए प्रतिनिधियों को 6 वर्ष के लिए चुनाव लडने से वंचित करने के प्रावधान हैं।