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मेहनत की राह पर बढ़ीं नीतू साहू हुनर से कमाई और बनीं ‘लखपति दीदी’

बिहान योजना से मिला संबल, कई आजीविका गतिविधियों से प्रतिमाह करीब 80 हजार रूपए की आय अर्जित कर नीतू दीदी ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी

लखपति नीतू बोली ,वह भी  17 सितम्बर को आशीर्वाद का एक दीया जाएगी

सारंगढ़-बिलाईगढ़, 15 सितम्बर 2026। ग्राम रिसोरा की नीतू साहू दीदी के लिए आत्मनिर्भरता की राह आसान नहीं थी। सीमित संसाधनों के बीच परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ उन्होंने आगे बढ़ने का रास्ता तलाशा। बिहान योजना से जुड़कर स्व-सहायता समूह का साथ मिला तो मेहनत को नई दिशा दी और धीरे-धीरे आजीविका के अलग-अलग साधन खड़े करती चली गईं। आज मशरूम उत्पादन, मत्स्य पालन, गाय पालन एवं दुग्ध व्यवसाय और मुर्गी पालन के जरिए वे करीब 80 हजार रूपए प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी यही मेहनत उन्हें ‘लखपति दीदी’ की पहचान तक लेकर आई है।

बरमकेला विकासखंड के ग्राम रिसोरा की रहने वाली नीतू साहू दीदी अन्नपूर्णा स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं और सखी संकुल संगठन बुदेली से जुड़ी हुई हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने उपलब्ध संसाधनों को आजीविका का आधार बनाने की दिशा में काम शुरू किया। अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने सखी संकुल संगठन बुदेली से 1 लाख 20 हजार रूपए तथा बिहान योजना के अंतर्गत बैंक से 30 हजार रूपए का ऋण लिया।
मिली आर्थिक मदद को उन्होंने एक ही गतिविधि में लगाने के बजाय अलग-अलग आजीविका साधनों को विकसित करने में उपयोग किया। मशरूम उत्पादन शुरू किया, तालाब में मछली पालन किया, गाय पालन के साथ दुग्ध व्यवसाय को आगे बढ़ाया और मुर्गी पालन भी अपनाया। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन लगातार मेहनत और अनुभव के साथ इन गतिविधियों का दायरा बढ़ता गया। अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली आय ने परिवार को आर्थिक मजबूती दी और नीतू दीदी का आत्मविश्वास भी बढ़ता गया।
आज नीतू साहू दीदी इन गतिविधियों से लगभग 80 हजार रूपए प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही हैं। उनके लिए यह केवल आय बढ़ने का आंकड़ा नहीं, बल्कि उस बदलाव का परिणाम है जो उन्होंने अपने प्रयासों से हासिल किया है। जिस गांव में उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ अपनी आजीविका की शुरुआत की थी, वहीं आज उनकी सफलता दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। गांव की महिलाएं उनसे आजीविका गतिविधियों की जानकारी ले रही हैं और स्वरोजगार के लिए आगे बढ़ने का प्रयास कर रही हैं।
अपनी सफलता और मिले सहयोग को याद करते हुए नीतू साहू दीदी सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित होने वाले ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को लेकर भी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि जिस तरह उनके जीवन में आगे बढ़ने का अवसर आया और आज वे अपने पैरों पर खड़ी होकर परिवार को आर्थिक मजबूती दे पा रही हैं, वह बदलाव उनके लिए बहुत मायने रखता है। इसी भावना के साथ वे 17 सितम्बर को अपने घर में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाएंगी और कहती हैं कि वहां भी आशीर्वाद का एक दीया जरूर जलाएंगी। उनके लिए यह दीया केवल रोशनी का प्रतीक नहीं, बल्कि उन अवसरों, सहयोग और संकल्प के प्रति कृतज्ञता का भाव है, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दी।
नीतू साहू दीदी की कहानी अब उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनकी सफलता यह बताती है कि स्व-सहायता समूह से जुड़कर उपलब्ध आर्थिक संसाधनों और स्थानीय साधनों का बेहतर उपयोग किया जाए तो ग्रामीण महिलाएं अपनी आजीविका को मजबूत कर सकती हैं। एक साथ कई गतिविधियों को अपनाकर उन्होंने आय के अलग-अलग स्रोत तैयार किए और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया।
सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आ रही नीतू साहू दीदी कहती है कि  वह भी 17 सितम्बर को अपने घर पर आशीर्वाद का एक दीया जलाएगी और सेवा संकल्प अभियान में अपनी सहभागिता निभाएगी।
नीतू की यह कहानी बदलाव की उस तस्वीर को सामने लाती है, जहां योजना का लाभ केवल कागजों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मेहनत और संकल्प के साथ किसी परिवार की जिंदगी में वास्तविक बदलाव का आधार बनता है। रिसोरा की नीतू साहू दीदी आज इसी बदलाव की जीवंत मिसाल हैं।